उत्तर प्रदेश में अगले साल के आग़ाज़ में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। इस दौरान वहां भाजपा को हराने के लिए किसानों ने कमर कस ली है। किसान संगठनों का कहना है कि बंगाल में ममता बनर्जी की जीत में उनकी भूमिका अहम थी।
तीन विवादित कृषि क़ानून को ख़त्म कराने के लिए पिछले कई महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। किसान संगठनों ने पाँच राज्यों के चुनाव से पहले एलान किया था कि वे भाजपा को हराने के लिए लोगों से अपील करेंगे और केन्द्र की असलियत लोगों को बताएंगे।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की हार के बाद, संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार नहीं मानी तो यूपी में भी हराएंगे। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि यूपी में भाजपा को हराने के लिए गांव-गांव जाकर लोगों से मिलेंगे।
उत्तर प्रदेश में अगले साल के आग़ाज़ में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। इस दौरान वहाँ भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए किसानों ने कमर कस ली है। किसान संगठनों का कहना है कि बंगाल में ममता बनर्जी की जीत में उनकी भूमिका थी। उनकी अपील पर ही वहाँ की जनता ने भाजपा को सत्ता से दूर रखा है।
किसान संगठनों का कहना है कि भाजपा सरकार ग़रीब और किसान विरोधी है। किसान संगठनों का कहना है कि वे पाँच महीने से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने केन्द्र सरकार को पश्चिम बंगाल की हार से सबक़ लेने का सुझाव देते हुए कहाः “पश्चिम बंगाल की हार से सरकार को समझ में आ जाना चाहिए कि किसान संगठन सरकार से बात करने के लिए तैयार है, सरकार को बग़ैर देरी के तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द कर देना चाहिए। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ख़रीद की गारंटी के लिए नया क़ानून बनाने का एलान करना चाहिए।”
राकेश टिकैत ने कहा कि अगर सरकार ने हमारी बातें नहीं मानी तो 2022 के उत्तर प्रदेश विधान विधान सभा चुनाव में भाजपा का विरोध किया जाएगा। गांव-गांव जाकर भाजपा के बजाए किसी भी दूसरे राजनैतिक दल को वोट देने की अपील की जाएगी।